Cg: गरियाबंद जिले में नशे के खिलाफ छेड़ा गया निर्णायक अभियान
प्रभारी सचिव हिमशिखर गुप्ता ने अफसरों को दिए सख्त निर्देश: गांव-गांव में गूंजेगी मुनादी, नशीली दवाओं की आपूर्ति पर लगेगी लगाम
गरियाबंद (गंगा प्रकाश)। गरियाबंद जिले में नशीली दवाओं और मादक पदार्थों की बढ़ती समस्या को लेकर शासन गंभीर हो गया है। इस दिशा में decisive और ठोस कदम उठाते हुए जिले के प्रभारी सचिव हिमशिखर गुप्ता ने आज कलेक्टोरेट सभागार में जिला स्तरीय एनकॉर्ड समन्वय समिति की महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नशीली दवाओं, अवैध शराब और अन्य मादक पदार्थों की आपूर्ति, बिक्री और उपयोग पर जिले में “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जाएगी।

बैठक में कलेक्टर बी.एस. उइके, पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा, वन मंडलाधिकारी लक्ष्मण सिंह, अपर कलेक्टर अरविंद पांडेय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र चंद्राकर, सहायक ड्रग कंट्रोलर संजय राजपूत सहित समन्वय समिति के अन्य सदस्य शामिल हुए।
प्रभारी सचिव ने बैठक में पूर्व बैठकों में दिए गए निर्देशों की समीक्षा करते हुए कहा कि नशे की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे अभियानों को और अधिक तेज़ी व व्यापकता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने खास तौर पर सीमा क्षेत्रों में नशीली दवाओं की तस्करी रोकने के लिए सघन चेकिंग और चेकपोस्ट्स पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए।
नशामुक्ति हेल्पलाइन को गांव-गांव तक पहुंचाने के निर्देश
श्री गुप्ता ने नशामुक्ति के लिए जारी दो महत्वपूर्ण टोल फ्री नम्बरों – 14446 (नशामुक्ति सहायता) और 1933 (मानस एंटी नारकोटिक्स हेल्पलाइन) – की जानकारी को गांव-गांव तक पहुंचाने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन नंबरों की दीवार लेखन, पोस्टर और मुनादी के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि आम जनता जागरूक हो और नशे के खिलाफ प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हो।
स्कूलों और कॉलेजों के 100 मीटर के दायरे में नशीले पदार्थों पर रोक
श्री गुप्ता ने शिक्षा संस्थानों के आसपास नशीले एवं तंबाकू उत्पादों की बिक्री को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कोटपा अधिनियम के तहत सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग को आदेशित किया कि वे स्कूलों व कॉलेजों में नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान चलाएं और युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से अवगत कराएं।

स्पर्श क्लिनिक के ज़रिए नशा पीड़ितों को उपचार देने के निर्देश
प्रभारी सचिव ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि स्पर्श क्लिनिक के माध्यम से नशे के शिकार मरीजों को मनोवैज्ञानिक परामर्श और उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि केवल रोकथाम ही नहीं, बल्कि पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य सहायता भी नशे के खिलाफ लड़ाई में जरूरी हथियार हैं।
कोरियर के माध्यम से हो रही आपूर्ति पर विशेष निगरानी
श्री गुप्ता ने ड्रग कंट्रोल विभाग को निर्देशित किया कि कोरियर माध्यम से हो रही नशीली दवाओं की अवैध आपूर्ति पर विशेष निगरानी रखी जाए। उन्होंने दवा दुकानों पर औचक निरीक्षण कर स्टॉक, बिक्री और एन्ट्री रजिस्टर की नियमित जांच करने को कहा।
सख्त कार्यवाही की चेतावनी
प्रभारी सचिव ने दो टूक कहा कि यदि किसी भी विभाग की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधी कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानूनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकार का मामला है, जिससे हमारे भविष्य – हमारी युवा पीढ़ी – जुड़ी हुई है।
जनजागरूकता ही असली हथियार
बैठक के दौरान कलेक्टर बी.एस. उइके ने बताया कि जिले में नशे की रोकथाम को लेकर ग्राम पंचायतों, स्कूलों और स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से निरंतर जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नशा केवल एक व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक बीमारी है, जिसे सामूहिक चेतना और जागरूकता से ही जड़ से मिटाया जा सकता है।
निष्कर्ष:
गरियाबंद जिला प्रशासन नशे के खिलाफ अब निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। प्रभारी सचिव हिमशिखर गुप्ता के सख्त निर्देशों से साफ है कि अब जिले में नशीली दवाओं, अवैध शराब और मादक पदार्थों की अवैध गतिविधियों पर कड़ा शिकंजा कसा जाएगा। प्रशासन की इस मुहिम में यदि आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित हो जाए, तो यह लड़ाई न केवल जीती जा सकती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को नशामुक्त समाज की सौगात भी दी जा सकती है।

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